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mahabharat 3.62.11: 'वह मुझमें इतनी आसक्त है कि मेरे कारण कष्ट उठा रही है। यदि वह मुझसे अलग हो जाए, तो शायद अपने स्वजनों के पास चली जाए ॥11॥   |   mahabharat अध्याय 3.62: राजा नलकी चिन्ता और दमयन्तीको अकेली सोती छोड़कर उनका अन्यत्र प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 62: राजा नलकी चिन्ता और दमयन्तीको अकेली सोती छोड़कर उनका अन्यत्र प्रस्थान  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  3.62.11 
मामियं ह्यनुरक्तैवं दु:खमाप्नोति मत्कृते।
मद्विहीना त्वियं गच्छेत् कदाचित् स्वजनं प्रति॥ ११॥
 
 
अनुवाद
'वह मुझमें इतनी आसक्त है कि मेरे कारण कष्ट उठा रही है। यदि वह मुझसे अलग हो जाए, तो शायद अपने स्वजनों के पास चली जाए ॥11॥
 
'She is so attached to me that she is suffering for my sake. If she is separated from me, perhaps she can go to her relatives. ॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)