Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.62.10: वह सोचने लगा, 'ऐसा करने से मेरा क्या होगा और ऐसा न करने से मेरा क्या होगा? अपनी प्रियतमा दमयन्ती को त्यागने से तो मेरा मर जाना ही अच्छा है॥10॥ | mahabharat अध्याय 3.62: राजा नलकी चिन्ता और दमयन्तीको अकेली सोती छोड़कर उनका अन्यत्र प्रस्थान । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
किं नु मे स्यादिदं कृत्वा किं नु मे स्यादकुर्वत:।
किं नु मे मरणं श्रेय: परित्यागो जनस्य वा॥ १०॥
अनुवाद
वह सोचने लगा, 'ऐसा करने से मेरा क्या होगा और ऐसा न करने से मेरा क्या होगा? अपनी प्रियतमा दमयन्ती को त्यागने से तो मेरा मर जाना ही अच्छा है॥10॥
He began to think, 'What will happen to me if I do this and what will happen if I don't do this. It is better for me to die than to abandon my beloved Damayanti.॥10॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥