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mahabharat 3.62.1: नल बोले, "हे प्रिये! इसमें कोई संदेह नहीं कि विदर्भ का राज्य तुम्हारे पिता के समान मेरा भी है। किन्तु मैं संकट में पड़ा हुआ हूँ, अतः किसी भी प्रकार वहाँ नहीं जाऊँगा।"   |   mahabharat अध्याय 3.62: राजा नलकी चिन्ता और दमयन्तीको अकेली सोती छोड़कर उनका अन्यत्र प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 62: राजा नलकी चिन्ता और दमयन्तीको अकेली सोती छोड़कर उनका अन्यत्र प्रस्थान  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  3.62.1 
नल उवाच
यथा राज्यं तव पितुस्तथा मम न संशय:।
न तु तत्र गमिष्यामि विषमस्थ: कथंचन॥ १॥
 
 
अनुवाद
नल बोले, "हे प्रिये! इसमें कोई संदेह नहीं कि विदर्भ का राज्य तुम्हारे पिता के समान मेरा भी है। किन्तु मैं संकट में पड़ा हुआ हूँ, अतः किसी भी प्रकार वहाँ नहीं जाऊँगा।"
 
Nala said, 'My dear! There is no doubt that the kingdom of Vidarbha belongs to me just as it belongs to your father. However, being in trouble, I will not go there in any way.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)