श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 61: नलका जूएमें हारकर दमयन्तीके साथ वनको जाना और पक्षियोंद्वारा आपद्‍ग्रस्त नलके वस्त्रका अपहरण  »  श्लोक 5-6
 
 
श्लोक  3.61.5-6 
तत: पुष्करमालोक्य नल: परममन्युमान्।
उत्सृज्य सर्वगात्रेभ्यो भूषणानि महायशा:॥ ५॥
एकवासा ह्यसंवीत: सुहृच्छोकविवर्धन:।
निश्चक्राम ततो राजा त्यक्त्वा सुविपुलां श्रियम्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
तदनन्तर महाबली नल अत्यन्त दुःखी होकर पुष्कर की ओर देखकर शरीर से सम्पूर्ण आभूषण उतार फेंके, केवल अधोवस्त्र पहने और बिना चादर ओढ़े, अपना विशाल धन छोड़कर तथा अपने मित्रों का शोक बढ़ाते हुए वे महल से चले गये ॥5-6॥
 
Thereafter, the great Nala became very sad and looked towards Pushkar, removed all the ornaments from his body, wore only underwear and without covering himself with a sheet, leaving behind his huge wealth and increasing the grief of his friends, he left the palace. 5-6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)