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श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 61: नलका जूएमें हारकर दमयन्तीके साथ वनको जाना और पक्षियोंद्वारा आपद्‍ग्रस्त नलके वस्त्रका अपहरण  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  3.61.36 
विदर्भराजस्तत्र त्वां पूजयिष्यति मानद।
तेन त्वं पूजितो राजन् सुखं वत्स्यसि नो गृहे॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
माननीय! वहाँ विदर्भ के राजा आपका बड़ा आदर-सत्कार करेंगे। हे राजन! उनसे सम्मानित होकर आप हमारे घर में सुखपूर्वक रहेंगे। 36.
 
Honorable! There the King of Vidarbha will treat you with great respect. O King! After being respected by him, you will live happily in our house. 36.
 
इति श्रीमहाभारते वनपर्वणि नलोपाख्यानपर्वणि नलवनयात्रायामेकषष्टितमोऽध्याय:॥ ६१॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत वनपर्वके अन्तर्गत नलोपाख्यानपर्वमें नलकी वनयात्राविषयक इकसठवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ६१॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)