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श्री महाभारत
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पर्व 3: वन पर्व
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अध्याय 61: नलका जूएमें हारकर दमयन्तीके साथ वनको जाना और पक्षियोंद्वारा आपद्ग्रस्त नलके वस्त्रका अपहरण
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श्लोक 35
श्लोक
3.61.35
यदि चायमभिप्रायस्तव ज्ञातीन् व्रजेदिति।
सहितावेव गच्छावो विदर्भान् यदि मन्यसे॥ ३५॥
अनुवाद
यदि आपकी यही मंशा है कि दमयन्ती अपने सम्बन्धियों के यहाँ चली जाए, तो यदि आपकी सहमति हो तो हम दोनों साथ-साथ विदर्भ देश में चलें ॥35॥
If it is your intention that Damayanti should go to her relatives' place, then if you agree, then let us both go to Vidarbha country together. 35॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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