Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.61.34: हे पुरुषश्रेष्ठ! आप मुझे बार-बार विदर्भ का मार्ग बता रहे हैं। हे देवतुल्य आर्यपुत्र! इससे आप मेरा दुःख ही बढ़ा रहे हैं।॥34॥ | mahabharat अध्याय 3.61: नलका जूएमें हारकर दमयन्तीके साथ वनको जाना और पक्षियोंद्वारा आपद्ग्रस्त नलके वस्त्रका अपहरण । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
पन्थानं हि ममाभीक्ष्णमाख्यासि च नरोत्तम।
अतो निमित्तं शोकं मे वर्धयस्यमरोपम॥ ३४॥
अनुवाद
हे पुरुषश्रेष्ठ! आप मुझे बार-बार विदर्भ का मार्ग बता रहे हैं। हे देवतुल्य आर्यपुत्र! इससे आप मेरा दुःख ही बढ़ा रहे हैं।॥34॥
O best of men! You are repeatedly telling me the way to Vidarbha. Oh Aryaputra, who is like a god! Because of this you are only increasing my grief. ॥ 34॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥