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mahabharat 3.61.33: हे राजन! मैं जानता हूँ कि आप स्वयं मुझे त्याग नहीं सकते, किन्तु हे राजन! इस घोर विपत्ति ने आपका मन मोह लिया है; अतः आप मुझे त्याग सकते हैं।   |   mahabharat अध्याय 3.61: नलका जूएमें हारकर दमयन्तीके साथ वनको जाना और पक्षियोंद्वारा आपद्‍ग्रस्त नलके वस्त्रका अपहरण   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  3.61.33 
अवैमि चाहं नृपते न तु मां त्यक्तुमर्हसि।
चेतसा त्वपकृष्टेन मां त्यजेथा महीपते॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! मैं जानता हूँ कि आप स्वयं मुझे त्याग नहीं सकते, किन्तु हे राजन! इस घोर विपत्ति ने आपका मन मोह लिया है; अतः आप मुझे त्याग सकते हैं।
 
O King, I know that you yourself cannot abandon me, but O King, this grave calamity has attracted your mind; therefore, you may abandon me.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)