श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 61: नलका जूएमें हारकर दमयन्तीके साथ वनको जाना और पक्षियोंद्वारा आपद्‍ग्रस्त नलके वस्त्रका अपहरण  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  3.61.32 
दमयन्त्युवाच
यदि मां त्वं महाराज न विहातुमिहेच्छसि।
तत् किमर्थं विदर्भाणां पन्था: समुपदिश्यते॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
दमयन्ती बोली- हे राजन, यदि आप मुझे त्यागना नहीं चाहते तो मुझे विदर्भ का रास्ता क्यों दिखा रहे हैं?
 
Damayanti said: O King, if you do not wish to abandon me, then why are you showing me the way to Vidarbha?
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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