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श्री महाभारत
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पर्व 3: वन पर्व
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अध्याय 61: नलका जूएमें हारकर दमयन्तीके साथ वनको जाना और पक्षियोंद्वारा आपद्ग्रस्त नलके वस्त्रका अपहरण
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श्लोक 31
श्लोक
3.61.31
न चाहं त्यक्तकामस्त्वां किमलं भीरु शङ्कसे।
त्यजेयमहमात्मानं न चैव त्वामनिन्दिते॥ ३१॥
अनुवाद
भीरु! मैं तुम्हें छोड़ना नहीं चाहता, फिर भी तुम इतना संदेह क्यों करते हो? अनिंदिते! मैं अपना शरीर त्याग सकता हूँ, परन्तु तुम्हें नहीं छोड़ सकता॥31॥
Bheeru! I do not wish to leave you, why do you have so much doubt? Anindite! I can give up my body, but I cannot leave you.॥ 31॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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