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श्री महाभारत
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पर्व 3: वन पर्व
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अध्याय 61: नलका जूएमें हारकर दमयन्तीके साथ वनको जाना और पक्षियोंद्वारा आपद्ग्रस्त नलके वस्त्रका अपहरण
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श्लोक 30
श्लोक
3.61.30
नल उवाच
एवमेतद् यथाऽऽत्थ त्वं दमयन्ति सुमध्यमे।
नास्ति भार्यासमं मित्रं नरस्यार्तस्य भेषजम्॥ ३०॥
अनुवाद
नल ने कहा, "सुमध्यमा दमयन्ती! तुम्हारा कहना ठीक है। दुःखी पुरुष के लिए उसकी पत्नी के समान न तो कोई मित्र है और न ही कोई औषधि।"
Nala said, "Sumadhyama Damayanti! What you say is correct. For a distressed man there is no friend or medicine like his wife."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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