श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 61: नलका जूएमें हारकर दमयन्तीके साथ वनको जाना और पक्षियोंद्वारा आपद्‍ग्रस्त नलके वस्त्रका अपहरण  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  3.61.20 
वैषम्यं परमं प्राप्तो दु:खितो गतचेतन:।
भर्ता तेऽहं निबोधेदं वचनं हितमात्मन:॥ २०॥
 
 
अनुवाद
'मैं बड़ी कठिन परिस्थिति में पड़ गया हूँ। पीड़ा के कारण मेरी चेतना नष्ट हो रही है। मैं तुम्हारा पति हूँ, अतः तुम्हारे हित के लिए कुछ कह रहा हूँ, इसे सुनो -॥20॥
 
'I have fallen into a very difficult situation. I am losing my consciousness due to the pain. I am your husband, so I am telling you something for your benefit, listen to this -॥ 20॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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