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mahabharat 3.61.2: राजा ! राज्य हारकर पुष्कर ने हँसते हुए नल से कहा, 'क्या अब फिर से जुआ खेलना शुरू कर देना चाहिए? अब तुम्हारे पास दांव पर लगाने के लिए क्या बचा है?'॥ 2॥   |   mahabharat अध्याय 3.61: नलका जूएमें हारकर दमयन्तीके साथ वनको जाना और पक्षियोंद्वारा आपद्‍ग्रस्त नलके वस्त्रका अपहरण   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  3.61.2 
हृतराज्यं नलं राजन् प्रहसन् पुष्करोऽब्रवीत्।
द्यूतं प्रवर्ततां भूय: प्रतिपाणोऽस्ति कस्तव॥ २॥
 
 
अनुवाद
राजा ! राज्य हारकर पुष्कर ने हँसते हुए नल से कहा, 'क्या अब फिर से जुआ खेलना शुरू कर देना चाहिए? अब तुम्हारे पास दांव पर लगाने के लिए क्या बचा है?'॥ 2॥
 
King! After losing the kingdom, Pushkar laughingly said to Nala, 'Should the gambling begin again? What do you have to stake now?'॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)