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mahabharat 3.61.16: हे मूढ़ बुद्धि वाले राजा! हम पासे हैं (पक्षी नहीं) और हम आपके वस्त्र चुराने के उद्देश्य से यहाँ आए थे। आप वहाँ से अपने वस्त्र पहनकर ही लौट आए, इससे हम प्रसन्न नहीं हुए॥16॥   |   mahabharat अध्याय 3.61: नलका जूएमें हारकर दमयन्तीके साथ वनको जाना और पक्षियोंद्वारा आपद्‍ग्रस्त नलके वस्त्रका अपहरण   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 61: नलका जूएमें हारकर दमयन्तीके साथ वनको जाना और पक्षियोंद्वारा आपद्‍ग्रस्त नलके वस्त्रका अपहरण  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  3.61.16 
वयमक्षा: सुदुर्बुद्धे तव वासो जिहीर्षव:।
आगता न हि न: प्रीति: सवाससि गते त्वयि॥ १६॥
 
 
अनुवाद
हे मूढ़ बुद्धि वाले राजा! हम पासे हैं (पक्षी नहीं) और हम आपके वस्त्र चुराने के उद्देश्य से यहाँ आए थे। आप वहाँ से अपने वस्त्र पहनकर ही लौट आए, इससे हम प्रसन्न नहीं हुए॥16॥
 
‘Oh king of foolish mind! We are dice (not birds) and we came here with the intention of stealing your clothes. You came back from there wearing your clothes, we were not happy with that.'॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)