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mahabharat 3.60.7: वे (मंत्री आदि) सभी प्रकृतियाँ दूसरी बार राजद्वार पर उपस्थित हुईं। दमयन्ती ने महाराज नल को यह बात बताई, परन्तु उन्होंने इसका स्वागत नहीं किया॥7॥   |   mahabharat अध्याय 3.60: दु:खित दमयन्तीका वार्ष्णेयके द्वारा कुमार-कुमारीको कुण्डिनपुर भेजना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 60: दु:खित दमयन्तीका वार्ष्णेयके द्वारा कुमार-कुमारीको कुण्डिनपुर भेजना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  3.60.7 
तास्तु सर्वा: प्रकृतयो द्वितीयं समुपस्थिता:।
न्यवेदयद् भीमसुता न च तत् प्रत्यनन्दत॥ ७॥
 
 
अनुवाद
वे (मंत्री आदि) सभी प्रकृतियाँ दूसरी बार राजद्वार पर उपस्थित हुईं। दमयन्ती ने महाराज नल को यह बात बताई, परन्तु उन्होंने इसका स्वागत नहीं किया॥7॥
 
All those (ministers etc.) natures appeared at the royal gate for the second time. Damayanti informed this to Maharaj Nal, but he did not welcome this. 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)