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mahabharat 3.60.4: उनकी धाय का नाम बृहत्सेना था। वह अत्यंत प्रसिद्ध और दूध पिलाने के कार्य में निपुण थी। वह सभी कार्यों में कुशल, हितैषी, प्रेममयी और मधुरभाषी थी। 4॥   |   mahabharat अध्याय 3.60: दु:खित दमयन्तीका वार्ष्णेयके द्वारा कुमार-कुमारीको कुण्डिनपुर भेजना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 60: दु:खित दमयन्तीका वार्ष्णेयके द्वारा कुमार-कुमारीको कुण्डिनपुर भेजना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  3.60.4 
बृहत्सेनामतियशां तां धात्रीं परिचारिकाम्।
हितां सर्वार्थकुशलामनुरक्तां सुभाषिताम्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
उनकी धाय का नाम बृहत्सेना था। वह अत्यंत प्रसिद्ध और दूध पिलाने के कार्य में निपुण थी। वह सभी कार्यों में कुशल, हितैषी, प्रेममयी और मधुरभाषी थी। 4॥
 
His nurse's name was Brihatsena. She was very famous and skilled in nursing work. She was skilled in all tasks, well-wisher, loving and sweet-spoken. 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)