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mahabharat 3.60.23-24: वहाँ पहुँचकर उन्होंने घोड़ों, उत्तम रथ, कन्या इन्द्रसेना और राजकुमार इन्द्रसेना को वहीं छोड़ दिया और राजा भीम से विदा लेकर राजा नल की दुर्दशा पर विलाप करते हुए अयोध्या नगरी में चले गये।   |   mahabharat अध्याय 3.60: दु:खित दमयन्तीका वार्ष्णेयके द्वारा कुमार-कुमारीको कुण्डिनपुर भेजना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 60: दु:खित दमयन्तीका वार्ष्णेयके द्वारा कुमार-कुमारीको कुण्डिनपुर भेजना  »  श्लोक 23-24
 
 
श्लोक  3.60.23-24 
हयांस्तत्र विनिक्षिप्य सूतो रथवरं च तम्।
इन्द्रसेनां च तां कन्यामिन्द्रसेनं च बालकम्॥ २३॥
आमन्त्र्य भीमं राजानमार्त: शोचन्नलं नृपम्।
अटमानस्ततोऽयोध्यां जगाम नगरीं तदा॥ २४॥
 
 
अनुवाद
वहाँ पहुँचकर उन्होंने घोड़ों, उत्तम रथ, कन्या इन्द्रसेना और राजकुमार इन्द्रसेना को वहीं छोड़ दिया और राजा भीम से विदा लेकर राजा नल की दुर्दशा पर विलाप करते हुए अयोध्या नगरी में चले गये।
 
Reaching there he left the horses, the excellent chariot, the girl Indrasena and prince Indrasena there and after taking leave from king Bhima he went to the city of Ayodhya wandering around and mourning for the plight of king Nala.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)