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mahabharat 3.60.18: सारथि! मैं आपकी शरण में आया हूँ, मेरी बात सुनिए। मेरे मन में बुरे विचार आ रहे हैं, इससे यह अनुमान होता है कि राजा नल का राज्य छिन सकता है॥18॥   |   mahabharat अध्याय 3.60: दु:खित दमयन्तीका वार्ष्णेयके द्वारा कुमार-कुमारीको कुण्डिनपुर भेजना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 60: दु:खित दमयन्तीका वार्ष्णेयके द्वारा कुमार-कुमारीको कुण्डिनपुर भेजना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  3.60.18 
शरणं त्वां प्रपन्नास्मि सारथे कुरु मद्वच:।
न हि मे शुध्यते भाव: कदाचिद् विनशेदपि॥ १८॥
 
 
अनुवाद
सारथि! मैं आपकी शरण में आया हूँ, मेरी बात सुनिए। मेरे मन में बुरे विचार आ रहे हैं, इससे यह अनुमान होता है कि राजा नल का राज्य छिन सकता है॥18॥
 
‘Charioteer! I have come to you for refuge, listen to me. Evil thoughts come to my mind, from this it is assumed that it is possible that King Nala may lose his kingdom.॥ 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)