Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.60.16-17: वह अपने मित्रों और सम्बन्धियों की बातें भी ठीक से नहीं सुनता। जुए में वह इतना मोहित हो गया है कि इस समय मेरी बातों का भी आदर नहीं कर रहा। मैं इसके लिए महामना नैषध को दोष नहीं देता। जुए में मोहित होने के कारण ही राजा मेरी बातों की कद्र नहीं कर रहा है।॥16-17॥ | mahabharat अध्याय 3.60: दु:खित दमयन्तीका वार्ष्णेयके द्वारा कुमार-कुमारीको कुण्डिनपुर भेजना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सुहृत्स्वजनवाक्यानि यथावन्न शृणोति च।
ममापि च तथा वाक्यं नाभिनन्दति मोहित:॥ १६॥
नूनं मन्ये न दोषोऽस्ति नैषधस्य महात्मन:।
यत् तु मे वचनं राजा नाभिनन्दति मोहित:॥ १७॥
अनुवाद
वह अपने मित्रों और सम्बन्धियों की बातें भी ठीक से नहीं सुनता। जुए में वह इतना मोहित हो गया है कि इस समय मेरी बातों का भी आदर नहीं कर रहा। मैं इसके लिए महामना नैषध को दोष नहीं देता। जुए में मोहित होने के कारण ही राजा मेरी बातों की कद्र नहीं कर रहा है।॥16-17॥
‘He does not listen to the words of his friends and relatives properly. Gambling has so fascinated him that at this moment he is not even respecting my words. I certainly do not blame Mahamana Naishadha for this. It is because of being fascinated by gambling that the king is not appreciating my words.॥ 16-17॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥