vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 3: वन पर्व
»
अध्याय 60: दु:खित दमयन्तीका वार्ष्णेयके द्वारा कुमार-कुमारीको कुण्डिनपुर भेजना
»
श्लोक 15
श्लोक
3.60.15
यथा च पुष्करस्याक्षा: पतन्ति वशवर्तिन:।
तथा विपर्ययश्चापि नलस्याक्षेषु दृश्यते॥ १५॥
अनुवाद
जैसे पुष्कर के पासे उसकी इच्छा के अनुसार पड़ते दिखाई देते हैं, वैसे ही नल के पासे उसकी इच्छा के विपरीत पड़ते दिखाई देते हैं॥15॥
‘Just as Pushkar's dice are seen falling according to his wish, Nala's dice are seen falling opposite to his wish.॥ 15॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×