श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 60: दु:खित दमयन्तीका वार्ष्णेयके द्वारा कुमार-कुमारीको कुण्डिनपुर भेजना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  3.60.15 
यथा च पुष्करस्याक्षा: पतन्ति वशवर्तिन:।
तथा विपर्ययश्चापि नलस्याक्षेषु दृश्यते॥ १५॥
 
 
अनुवाद
जैसे पुष्कर के पासे उसकी इच्छा के अनुसार पड़ते दिखाई देते हैं, वैसे ही नल के पासे उसकी इच्छा के विपरीत पड़ते दिखाई देते हैं॥15॥
 
‘Just as Pushkar's dice are seen falling according to his wish, Nala's dice are seen falling opposite to his wish.॥ 15॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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