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श्लोक 3.60.15  |
यथा च पुष्करस्याक्षा: पतन्ति वशवर्तिन:।
तथा विपर्ययश्चापि नलस्याक्षेषु दृश्यते॥ १५॥ |
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| अनुवाद |
| जैसे पुष्कर के पासे उसकी इच्छा के अनुसार पड़ते दिखाई देते हैं, वैसे ही नल के पासे उसकी इच्छा के विपरीत पड़ते दिखाई देते हैं॥15॥ |
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| ‘Just as Pushkar's dice are seen falling according to his wish, Nala's dice are seen falling opposite to his wish.॥ 15॥ |
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