श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 60: दु:खित दमयन्तीका वार्ष्णेयके द्वारा कुमार-कुमारीको कुण्डिनपुर भेजना  »  श्लोक 11-12
 
 
श्लोक  3.60.11-12 
बृहत्सेना तु सा श्रुत्वा दमयन्त्या: प्रभाषितम्।
वार्ष्णेयमानयामास पुरुषैराप्तकारिभि:॥ ११॥
वार्ष्णेयं तु ततो भैमी सान्त्वयञ्श्लक्ष्णया गिरा।
उवाच देशकालज्ञा प्राप्तकालमनिन्दिता॥ १२॥
 
 
अनुवाद
दमयन्ती की बात सुनकर बृहत्सेन ने अपने विश्वस्त जनों द्वारा वार्ष्णेय को बुलाया। तब अजेय स्वभाव वाली तथा देश-काल को जानने वाली भीमकुमारी दमयन्ती ने मधुर वाणी में वार्ष्णेय को सान्त्वना देते हुए यह समयोचित बात कही -॥11-12॥
 
Brihatsena, hearing Damayanti's words, called Varshneya through his trusted men. Then Bhimkumari Damayanti, who has an invincible nature and knows the time and place, consoled Varshneya in a sweet voice and said this timely thing -॥ 11-12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)