Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.60.1-2: महर्षि बृहदश्व कहते हैं, "हे राजन! तत्पश्चात दमयन्ती ने देखा कि धर्मात्मा राजा नल उन्मत्त की भाँति जुए में मग्न हैं। वह स्वयं भी सावधान हो गई। उन्हें ऐसी अवस्था में देखकर भीमपुत्री भय और शोक से व्याकुल हो गई और राजा के हित के लिए कोई महत्त्वपूर्ण कार्य सोचने लगी। 1-2.   |   mahabharat अध्याय 3.60: दु:खित दमयन्तीका वार्ष्णेयके द्वारा कुमार-कुमारीको कुण्डिनपुर भेजना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 60: दु:खित दमयन्तीका वार्ष्णेयके द्वारा कुमार-कुमारीको कुण्डिनपुर भेजना  »  श्लोक 1-2
 
 
श्लोक  3.60.1-2 
बृहदश्व उवाच
दमयन्ती ततो दृष्ट्वा पुण्यश्लोकं नराधिपम्।
उन्मत्तवदनुन्मत्ता देवने गतचेतसम्॥ १॥
भयशोकसमाविष्टा राजन् भीमसुता तत:।
चिन्तयामास तत् कार्यं सुमहत् पार्थिवं प्रति॥ २॥
 
 
अनुवाद
महर्षि बृहदश्व कहते हैं, "हे राजन! तत्पश्चात दमयन्ती ने देखा कि धर्मात्मा राजा नल उन्मत्त की भाँति जुए में मग्न हैं। वह स्वयं भी सावधान हो गई। उन्हें ऐसी अवस्था में देखकर भीमपुत्री भय और शोक से व्याकुल हो गई और राजा के हित के लिए कोई महत्त्वपूर्ण कार्य सोचने लगी। 1-2.
 
Sage Brihadashwa says, "O King! Thereafter Damayanti saw that the virtuous King Nala was engrossed in gambling like a madman. She herself was cautious. Seeing him in such a state, Bhima's daughter became restless with fear and grief and started thinking of some important work for the benefit of the King. 1-2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)