श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 6: धृतराष्ट्रका संजयको भेजकर विदुरको वनसे बुलवाना और उनसे क्षमा-प्रार्थना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  3.6.24 
पाण्डो: सुता यादृशा मे तादृशास्तव भारत।
दीना इतीव मे बुद्धिरभिपन्नाद्य तान् प्रति॥ २४॥
 
 
अनुवाद
हे भारत! जैसे पाण्डु के पुत्र मेरे लिए वैसे ही तुम्हारे पुत्र भी हैं। परन्तु पाण्डव इन दिनों बड़ी दयनीय स्थिति में हैं, इसलिए मेरा मन उनकी ओर लगा हुआ है॥ 24॥
 
O Bharata! Just as Pandu's sons are to me, so are yours. But the Pandavas are in a pitiable state these days, so my heart is inclined towards them.॥ 24॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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