Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.6.22-23: विदुर बोले - राजन! मैंने सबको क्षमा कर दिया है। आप मेरे परम गुरु हैं। मैं शीघ्र ही आपके दर्शन करने आया हूँ। हे पुरुषश्रेष्ठ! पुण्यात्मा पुरुष दीन-दुःखियों की ओर अधिक झुकते हैं। आपको अपने मन में ऐसा विचार नहीं करना चाहिए ॥ 22-23॥ | mahabharat अध्याय 3.6: धृतराष्ट्रका संजयको भेजकर विदुरको वनसे बुलवाना और उनसे क्षमा-प्रार्थना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
विदुर बोले - राजन! मैंने सबको क्षमा कर दिया है। आप मेरे परम गुरु हैं। मैं शीघ्र ही आपके दर्शन करने आया हूँ। हे पुरुषश्रेष्ठ! पुण्यात्मा पुरुष दीन-दुःखियों की ओर अधिक झुकते हैं। आपको अपने मन में ऐसा विचार नहीं करना चाहिए ॥ 22-23॥
Vidur said - King! I have forgiven everyone. You are my supreme Guru. I have come to see you in a hurry. O best of men! The virtuous men are more inclined towards the poor people. You should not think about this in your mind. ॥ 22-23॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥