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श्लोक 3.6.16  |
संजय उवाच
राजा स्मरति ते क्षत्तर्धृतराष्ट्रोऽम्बिकासुत:।
तं पश्य गत्वा त्वं क्षिप्रं संजीवय च पार्थिवम्॥ १६॥ |
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| अनुवाद |
| संजय ने कहा— विदुरजी! अम्बिकानन्दन महाराज धृतराष्ट्र आपको स्मरण करते हैं। आप शीघ्र जाकर उनसे मिलें और उन्हें जीवनदान दें॥16॥ |
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| Sanjaya said— Viduraji! Ambikanandan Maharaja Dhritarashtra remembers you. You go quickly and meet him and give him life.॥ 16॥ |
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