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mahabharat 3.6.10: 'बुद्धिमान संजय! मैंने परम बुद्धिमान विदुर के प्रति बड़ा अपराध किया है। जाओ और उन्हें लौटा लाओ, अन्यथा मैं अपने प्राण त्याग दूँगा।'॥10॥   |   mahabharat अध्याय 3.6: धृतराष्ट्रका संजयको भेजकर विदुरको वनसे बुलवाना और उनसे क्षमा-प्रार्थना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 6: धृतराष्ट्रका संजयको भेजकर विदुरको वनसे बुलवाना और उनसे क्षमा-प्रार्थना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  3.6.10 
स व्यलीकं परं प्राप्तो मत्त: परमबुद्धिमान्।
त्यक्ष्यामि जीवितं प्राज्ञ तं गच्छानय संजय॥ १०॥
 
 
अनुवाद
'बुद्धिमान संजय! मैंने परम बुद्धिमान विदुर के प्रति बड़ा अपराध किया है। जाओ और उन्हें लौटा लाओ, अन्यथा मैं अपने प्राण त्याग दूँगा।'॥10॥
 
'Wise Sanjaya! I have committed a great crime against the most intelligent Vidura. Go and bring him back, otherwise I will give up my life.'॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)