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mahabharat 3.59.9-10: उस समय कलियुग के प्रभाव से ग्रस्त राजा नल स्वर्ण, रथ, अन्य वाहन और बहुमूल्य वस्त्र आदि जुआ खेलते थे और उन्हें हार जाते थे। उस समय पासों के खेल में उन्मत्त शत्रुनाशक नल को जुआ खेलने से रोकने वाला उनके मित्रों में कोई नहीं था।   |   mahabharat अध्याय 3.59: नलमें कलियुगका प्रवेश एवं नल और पुष्करकी द्यूतक्रीडा, प्रजा और दमयन्तीके निवारण करनेपर भी राजाका द्यूतसे निवृत्त नहीं होना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 59: नलमें कलियुगका प्रवेश एवं नल और पुष्करकी द्यूतक्रीडा, प्रजा और दमयन्तीके निवारण करनेपर भी राजाका द्यूतसे निवृत्त नहीं होना  »  श्लोक 9-10
 
 
श्लोक  3.59.9-10 
हिरण्यस्य सुवर्णस्य यानयुग्यस्य वाससाम्।
आविष्ट: कलिना द्यूते जीयते स्म नलस्तदा॥ ९॥
तमक्षमदसम्मत्तं सुहृदां न तु कश्चन।
निवारणेऽभवच्छक्तो दीव्यमानमरिंदमम्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
उस समय कलियुग के प्रभाव से ग्रस्त राजा नल स्वर्ण, रथ, अन्य वाहन और बहुमूल्य वस्त्र आदि जुआ खेलते थे और उन्हें हार जाते थे। उस समय पासों के खेल में उन्मत्त शत्रुनाशक नल को जुआ खेलने से रोकने वाला उनके मित्रों में कोई नहीं था।
 
Then, King Nala, possessed by the influence of Kaliyuga, used to gamble gold, gold, chariots and other vehicles and precious clothes and would lose them. There was no one among his friends who could stop Nala, the destroyer of enemies, from gambling at that time, who was mad with the game of dice.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)