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mahabharat 3.59.7: शत्रु योद्धाओं का संहार करने वाला पुष्कर, वीर नल के पास गया और उनसे बार-बार कहा, "आओ हम दोनों धर्मपूर्वक जुआ खेलें।" पुष्कर राजा नल का भाई लगता था।   |   mahabharat अध्याय 3.59: नलमें कलियुगका प्रवेश एवं नल और पुष्करकी द्यूतक्रीडा, प्रजा और दमयन्तीके निवारण करनेपर भी राजाका द्यूतसे निवृत्त नहीं होना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 59: नलमें कलियुगका प्रवेश एवं नल और पुष्करकी द्यूतक्रीडा, प्रजा और दमयन्तीके निवारण करनेपर भी राजाका द्यूतसे निवृत्त नहीं होना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  3.59.7 
आसाद्य तु नलं वीरं पुष्कर: परवीरहा।
दीव्यावेत्यब्रवीद् भ्राता वृषेणेति मुहुर्मुहु:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
शत्रु योद्धाओं का संहार करने वाला पुष्कर, वीर नल के पास गया और उनसे बार-बार कहा, "आओ हम दोनों धर्मपूर्वक जुआ खेलें।" पुष्कर राजा नल का भाई लगता था।
 
Pushkar, the slayer of enemy warriors, went to the valiant Nala and told him repeatedly, "Let us both gamble in a righteous manner." Pushkar seemed like a brother to King Nala.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)