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mahabharat 3.59.2: राजा बहुत समय तक निषाददेश में रहकर प्रतिदिन नल के छिद्र को देखते रहे। बारह वर्ष के पश्चात् एक दिन कलि को एक छिद्र दिखाई दिया॥2॥   |   mahabharat अध्याय 3.59: नलमें कलियुगका प्रवेश एवं नल और पुष्करकी द्यूतक्रीडा, प्रजा और दमयन्तीके निवारण करनेपर भी राजाका द्यूतसे निवृत्त नहीं होना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 59: नलमें कलियुगका प्रवेश एवं नल और पुष्करकी द्यूतक्रीडा, प्रजा और दमयन्तीके निवारण करनेपर भी राजाका द्यूतसे निवृत्त नहीं होना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  3.59.2 
स नित्यमन्तरप्रेप्सुर्निषधेष्ववसच्चिरम्।
अथास्य द्वादशे वर्षे ददर्श कलिरन्तरम्॥ २॥
 
 
अनुवाद
राजा बहुत समय तक निषाददेश में रहकर प्रतिदिन नल के छिद्र को देखते रहे। बारह वर्ष के पश्चात् एक दिन कलि को एक छिद्र दिखाई दिया॥2॥
 
The king stayed in Nishadesh for a long time looking at the hole in the tap every day. After twelve years, one day Kali saw a hole.॥2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)