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mahabharat 3.59.13: निषादराज से प्रार्थना कीजिए। मंत्रियों सहित सारी प्रजा द्वार पर खड़ी है, क्योंकि वे धर्म और अर्थ के तत्त्व को जानने वाले राजा पर आने वाले संकट को सहन करने में असमर्थ हैं।॥13॥   |   mahabharat अध्याय 3.59: नलमें कलियुगका प्रवेश एवं नल और पुष्करकी द्यूतक्रीडा, प्रजा और दमयन्तीके निवारण करनेपर भी राजाका द्यूतसे निवृत्त नहीं होना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 59: नलमें कलियुगका प्रवेश एवं नल और पुष्करकी द्यूतक्रीडा, प्रजा और दमयन्तीके निवारण करनेपर भी राजाका द्यूतसे निवृत्त नहीं होना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  3.59.13 
निवेद्यतां नैषधाय सर्वा: प्रकृतय: स्थिता:।
अमृष्यमाणा व्यसनं राज्ञो धर्मार्थदर्शिन:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
निषादराज से प्रार्थना कीजिए। मंत्रियों सहित सारी प्रजा द्वार पर खड़ी है, क्योंकि वे धर्म और अर्थ के तत्त्व को जानने वाले राजा पर आने वाले संकट को सहन करने में असमर्थ हैं।॥13॥
 
‘Please request the King of Nishad. The entire people, including the ministers, are standing at the door as they are unable to bear the impending danger to the King who knows the essence of Dharma and Artha.’॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)