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mahabharat 3.58.4: तब इन्द्र मुस्कुराये और बोले, "स्वयंवर हो चुका है। दमयन्ती ने हमारी उपस्थिति में राजा नल को अपना पति चुना है।"   |   mahabharat अध्याय 3.58: देवताओंके द्वारा नलके गुणोंका गान और उनके निषेध करनेपर भी नलके विरुद्ध कलियुगका कोप   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 58: देवताओंके द्वारा नलके गुणोंका गान और उनके निषेध करनेपर भी नलके विरुद्ध कलियुगका कोप  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  3.58.4 
तमब्रवीत् प्रहस्येन्द्रो निर्वृत्त: स स्वयंवर:।
वृतस्तया नलो राजा पतिरस्मत्समीपत:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
तब इन्द्र मुस्कुराये और बोले, "स्वयंवर हो चुका है। दमयन्ती ने हमारी उपस्थिति में राजा नल को अपना पति चुना है।"
 
Then Indra smiled and said, "The swayamvara has taken place. Damayanti chose King Nala as her husband in our presence."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)