श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 58: देवताओंके द्वारा नलके गुणोंका गान और उनके निषेध करनेपर भी नलके विरुद्ध कलियुगका कोप  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  3.58.2 
अथाब्रवीत् कलिं शक्र: सम्प्रेक्ष्य बलवृत्रहा।
द्वापरेण सहायेन कले ब्रूहि क्व यास्यसि॥ २॥
 
 
अनुवाद
कलियुग को देखकर बल और वृत्रासुर का नाश करने वाले इन्द्र ने पूछा - 'काले! बता तू द्वापर को लेकर कहाँ जा रहा है?'॥2॥
 
On seeing Kaliyug, Indra, the destroyer of Bala and Vritraasura, asked - 'Kaale! Tell me where are you going with Dwapar?'॥2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)