Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.58.13-14: तदनन्तर देवताओं के चले जाने पर कलियुग ने द्वापर से कहा - 'द्वापर! मैं अपने क्रोध पर नियंत्रण नहीं रख सकता। मैं नल के अन्दर निवास करके उसे राज्य से वंचित कर दूँगा। जिससे वह दमयन्ती के साथ भोग नहीं कर सकेगा। तुम भी जुए के पासों में प्रवेश करके मेरी सहायता करो।'॥13-14॥ | mahabharat अध्याय 3.58: देवताओंके द्वारा नलके गुणोंका गान और उनके निषेध करनेपर भी नलके विरुद्ध कलियुगका कोप । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तदनन्तर देवताओं के चले जाने पर कलियुग ने द्वापर से कहा - 'द्वापर! मैं अपने क्रोध पर नियंत्रण नहीं रख सकता। मैं नल के अन्दर निवास करके उसे राज्य से वंचित कर दूँगा। जिससे वह दमयन्ती के साथ भोग नहीं कर सकेगा। तुम भी जुए के पासों में प्रवेश करके मेरी सहायता करो।'॥13-14॥
Thereafter, when the gods left, Kaliyuga said to Dwapara - 'Dwapara! I cannot control my anger. I will reside inside Nala and deprive him of the kingdom. Due to which he will not be able to enjoy with Damayanti. You should also help me by entering the dice of gambling'॥ 13-14॥
इति श्रीमहाभारते वनपर्वणि नलोपाख्यानपर्वणि कलिदेवसंवादे अष्टपञ्चाशत्तमोऽध्याय:॥ ५८॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत वनपर्वके अन्तर्गत नलोपाख्यानपर्वमें कलि-देवता-संवादविषयक अट्ठावनवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ५८॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥