एवं स यजमानश्च विहरंश्च नराधिप:।
ररक्ष वसुसम्पूर्णां वसुधां वसुधाधिप:॥ ४७॥
अनुवाद
इस प्रकार यज्ञ करते हुए तथा सुखपूर्वक रहते हुए महाराज नल ने धन-धान्य से परिपूर्ण पृथ्वी का शासन किया।
Thus, by performing sacrifices and living happily, Maharaja Nala ruled the earth, which was full of wealth and grains. 47.
इति श्रीमहाभारते वनपर्वणि नलोपाख्यानपर्वणि दमयन्तीस्वयंवरे सप्तपञ्चाशत्तमोऽध्याय:॥ ५७॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत वनपर्वके अन्तर्गत दमयन्ती-स्वयंवरविषयक सत्तावनवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ५७॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)