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mahabharat 3.57.43-44h: राजा नल सूर्य के समान तेजस्वी थे। वीर नल अत्यन्त प्रसन्न रहते थे और अपनी प्रजा का धर्मपूर्वक पालन करके उसे सुखी रखते थे। 43 1/2   |   mahabharat अध्याय 3.57: स्वयंवरमें दमयन्तीद्वारा नलका वरण, देवताओंका नलको वर देना, देवताओं और राजाओंका प्रस्थान, नल-दमयन्तीका विवाह एवं नलका यज्ञानुष्ठान और संतानोत्पादन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 57: स्वयंवरमें दमयन्तीद्वारा नलका वरण, देवताओंका नलको वर देना, देवताओं और राजाओंका प्रस्थान, नल-दमयन्तीका विवाह एवं नलका यज्ञानुष्ठान और संतानोत्पादन  »  श्लोक 43-44h
 
 
श्लोक  3.57.43-44h 
अतीव मुदितो राजा भ्राजमानोंऽशुमानिव॥ ४३॥
अरञ्जयत् प्रजा वीरो धर्मेण परिपालयन्।
 
 
अनुवाद
राजा नल सूर्य के समान तेजस्वी थे। वीर नल अत्यन्त प्रसन्न रहते थे और अपनी प्रजा का धर्मपूर्वक पालन करके उसे सुखी रखते थे। 43 1/2
 
King Nala shone like the Sun. The brave Nala remained very happy and kept his subjects happy by taking care of them righteously. 43 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)