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mahabharat 3.57.39-40h: इस प्रकार राजा नल को वर देकर देवता स्वर्ग को चले गए। स्वयंवर में आए हुए राजा आश्चर्यचकित हो गए और नल और दमयन्ती के विवाहोत्सव जैसा आनंद अनुभव करते हुए जैसे आए थे, वैसे ही प्रसन्नतापूर्वक लौट गए। 39 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 3.57: स्वयंवरमें दमयन्तीद्वारा नलका वरण, देवताओंका नलको वर देना, देवताओं और राजाओंका प्रस्थान, नल-दमयन्तीका विवाह एवं नलका यज्ञानुष्ठान और संतानोत्पादन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 57: स्वयंवरमें दमयन्तीद्वारा नलका वरण, देवताओंका नलको वर देना, देवताओं और राजाओंका प्रस्थान, नल-दमयन्तीका विवाह एवं नलका यज्ञानुष्ठान और संतानोत्पादन  »  श्लोक 39-40h
 
 
श्लोक  3.57.39-40h 
वरानेवं प्रदायास्य देवास्ते त्रिदिवं गता:।
पार्थिवाश्चानुभूयास्य विवाहं विस्मयान्विता:॥ ३९॥
दमयन्त्याश्च मुदिता: प्रतिजग्मुर्यथागतम्।
 
 
अनुवाद
इस प्रकार राजा नल को वर देकर देवता स्वर्ग को चले गए। स्वयंवर में आए हुए राजा आश्चर्यचकित हो गए और नल और दमयन्ती के विवाहोत्सव जैसा आनंद अनुभव करते हुए जैसे आए थे, वैसे ही प्रसन्नतापूर्वक लौट गए। 39 1/2॥
 
In this way, after giving a boon to King Nala, the gods went to heaven. The kings who had come to the Swayamvara were astounded and returned as happily as they had come, feeling like the marriage ceremony of Nala and Damayanti. 39 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)