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mahabharat 3.57.38: जल के देवता वरुण ने नल को उनकी इच्छानुसार जल प्रकट होने का वरदान दिया और यह भी कहा कि ‘तुम्हारी पुष्पमालाएं सदैव सुखद सुगंध से भरी रहेंगी।’ इस प्रकार सभी देवताओं ने नल को दो-दो वरदान दिए।   |   mahabharat अध्याय 3.57: स्वयंवरमें दमयन्तीद्वारा नलका वरण, देवताओंका नलको वर देना, देवताओं और राजाओंका प्रस्थान, नल-दमयन्तीका विवाह एवं नलका यज्ञानुष्ठान और संतानोत्पादन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 57: स्वयंवरमें दमयन्तीद्वारा नलका वरण, देवताओंका नलको वर देना, देवताओं और राजाओंका प्रस्थान, नल-दमयन्तीका विवाह एवं नलका यज्ञानुष्ठान और संतानोत्पादन  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  3.57.38 
अपां पतिरपां भावं यत्र वाञ्छति नैषध:।
स्रजश्चोत्तमगन्धाढॺा: सर्वे च मिथुनं ददु:॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
जल के देवता वरुण ने नल को उनकी इच्छानुसार जल प्रकट होने का वरदान दिया और यह भी कहा कि ‘तुम्हारी पुष्पमालाएं सदैव सुखद सुगंध से भरी रहेंगी।’ इस प्रकार सभी देवताओं ने नल को दो-दो वरदान दिए।
 
Varuna, the lord of water, granted Nala the boon of water appearing as per his wish and also said that 'your garlands of flowers will always be filled with pleasant fragrance.' In this way all the gods granted two boons each.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)