Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.57.35-36h: शचीपति इन्द्र ने प्रसन्न होकर निषादराज नल को यह वर दिया कि 'मैं यज्ञ में तुम्हें प्रत्यक्ष दर्शन दूँगा और अन्त में शुभ फल प्रदान करूँगा' ॥35 1/2॥ | mahabharat अध्याय 3.57: स्वयंवरमें दमयन्तीद्वारा नलका वरण, देवताओंका नलको वर देना, देवताओं और राजाओंका प्रस्थान, नल-दमयन्तीका विवाह एवं नलका यज्ञानुष्ठान और संतानोत्पादन । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
शचीपति इन्द्र ने प्रसन्न होकर निषादराज नल को यह वर दिया कि 'मैं यज्ञ में तुम्हें प्रत्यक्ष दर्शन दूँगा और अन्त में शुभ फल प्रदान करूँगा' ॥35 1/2॥
Sachipati Indra was pleased and gave this boon to Nishadharaj Nala that 'I will give you direct darshan in the Yagya and will bestow auspiciousness in the end'. 35 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥