Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.57.33-34h: इसी प्रकार दमयन्ती ने भी हाथ जोड़कर और विनीत वचनों से राजा नल को नमस्कार किया। दोनों एक-दूसरे को पाकर अत्यन्त प्रसन्न हुए। अग्नि आदि देवताओं को अपने सम्मुख देखकर उन्होंने मन ही मन उनकी शरण ली। | mahabharat अध्याय 3.57: स्वयंवरमें दमयन्तीद्वारा नलका वरण, देवताओंका नलको वर देना, देवताओं और राजाओंका प्रस्थान, नल-दमयन्तीका विवाह एवं नलका यज्ञानुष्ठान और संतानोत्पादन । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
इसी प्रकार दमयन्ती ने भी हाथ जोड़कर और विनीत वचनों से राजा नल को नमस्कार किया। दोनों एक-दूसरे को पाकर अत्यन्त प्रसन्न हुए। अग्नि आदि देवताओं को अपने सम्मुख देखकर उन्होंने मन ही मन उनकी शरण ली।
Similarly, Damayanti also greeted King Nala with folded hands and polite words. Both of them were very happy to find each other. Seeing the gods like Agni etc. in front of them, they mentally took refuge in them. 33 1/2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥