Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.57.31: 'कल्याणि! तुम्हारे इस अनन्य प्रेम के कारण, क्योंकि तुमने देवताओं के समक्ष मेरे समान पुरुष का वरण किया है, इसलिए तुम अपने इस पति को सदैव अपनी प्रत्येक आज्ञा का पालन करने में तत्पर समझो ॥31॥ | mahabharat अध्याय 3.57: स्वयंवरमें दमयन्तीद्वारा नलका वरण, देवताओंका नलको वर देना, देवताओं और राजाओंका प्रस्थान, नल-दमयन्तीका विवाह एवं नलका यज्ञानुष्ठान और संतानोत्पादन । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
'कल्याणि! तुम्हारे इस अनन्य प्रेम के कारण, क्योंकि तुमने देवताओं के समक्ष मेरे समान पुरुष का वरण किया है, इसलिए तुम अपने इस पति को सदैव अपनी प्रत्येक आज्ञा का पालन करने में तत्पर समझो ॥31॥
'Kalyani! Because of this extraordinary love for you, since you have chosen a man like me in front of the gods, you should always consider this husband of yours to be ready to obey your every command. ॥ 31॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥