श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 57: स्वयंवरमें दमयन्तीद्वारा नलका वरण, देवताओंका नलको वर देना, देवताओं और राजाओंका प्रस्थान, नल-दमयन्तीका विवाह एवं नलका यज्ञानुष्ठान और संतानोत्पादन  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  3.57.26 
सा समीक्ष्य तु तान् देवान् पुण्यश्लोकं च भारत।
नैषधं वरयामास भैमी धर्मेण पाण्डव॥ २६॥
 
 
अनुवाद
भरतकुलभूषण पाण्डुनन्दन! राजकुमारी दमयन्ती ने पुनः उन देवताओं तथा धर्मात्मा नलक की ओर देखकर अपने धर्म के अनुसार निषधराज नलक का वरण कर लिया। 26॥
 
Bharatkulbhushan Pandunandan! Princess Damayanti, after looking again at those gods and the virtuous Nalka, chose Nishadharaj Nalka as per her religion. 26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)