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mahabharat 3.57.20: 'यदि मैंने यह व्रत केवल नल की पूजा करने के लिए आरम्भ किया है, तो देवताओं को चाहिए कि वे उसके माध्यम से मुझे सत्य बता दें।   |   mahabharat अध्याय 3.57: स्वयंवरमें दमयन्तीद्वारा नलका वरण, देवताओंका नलको वर देना, देवताओं और राजाओंका प्रस्थान, नल-दमयन्तीका विवाह एवं नलका यज्ञानुष्ठान और संतानोत्पादन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 57: स्वयंवरमें दमयन्तीद्वारा नलका वरण, देवताओंका नलको वर देना, देवताओं और राजाओंका प्रस्थान, नल-दमयन्तीका विवाह एवं नलका यज्ञानुष्ठान और संतानोत्पादन  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  3.57.20 
यथेदं व्रतमारब्धं नलस्याराधने मया।
तेन सत्येन मे देवास्तमेव प्रदिशन्तु मे॥ २०॥
 
 
अनुवाद
'यदि मैंने यह व्रत केवल नल की पूजा करने के लिए आरम्भ किया है, तो देवताओं को चाहिए कि वे उसके माध्यम से मुझे सत्य बता दें।
 
'If I have started this fast only to worship Nala, then the gods should reveal the truth to me through him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)