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mahabharat 3.57.2: यह सुनकर सभी राजा कामातुर होकर दमयन्ती को पाने की इच्छा से तुरन्त ही चल पड़े।   |   mahabharat अध्याय 3.57: स्वयंवरमें दमयन्तीद्वारा नलका वरण, देवताओंका नलको वर देना, देवताओं और राजाओंका प्रस्थान, नल-दमयन्तीका विवाह एवं नलका यज्ञानुष्ठान और संतानोत्पादन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 57: स्वयंवरमें दमयन्तीद्वारा नलका वरण, देवताओंका नलको वर देना, देवताओं और राजाओंका प्रस्थान, नल-दमयन्तीका विवाह एवं नलका यज्ञानुष्ठान और संतानोत्पादन  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  3.57.2 
तच्छ्रुत्वा पृथिवीपाला: सर्वे हृच्छयपीडिता:।
त्वरिता: समुपाजग्मुर्दमयन्तीमभीप्सव:॥ २॥
 
 
अनुवाद
यह सुनकर सभी राजा कामातुर होकर दमयन्ती को पाने की इच्छा से तुरन्त ही चल पड़े।
 
On hearing this, all the kings, overcome with lust, immediately set out with the desire to possess Damayanti.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)