vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 3: वन पर्व
»
अध्याय 57: स्वयंवरमें दमयन्तीद्वारा नलका वरण, देवताओंका नलको वर देना, देवताओं और राजाओंका प्रस्थान, नल-दमयन्तीका विवाह एवं नलका यज्ञानुष्ठान और संतानोत्पादन
»
श्लोक 2
श्लोक
3.57.2
तच्छ्रुत्वा पृथिवीपाला: सर्वे हृच्छयपीडिता:।
त्वरिता: समुपाजग्मुर्दमयन्तीमभीप्सव:॥ २॥
अनुवाद
यह सुनकर सभी राजा कामातुर होकर दमयन्ती को पाने की इच्छा से तुरन्त ही चल पड़े।
On hearing this, all the kings, overcome with lust, immediately set out with the desire to possess Damayanti.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×