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श्री महाभारत
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पर्व 3: वन पर्व
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अध्याय 57: स्वयंवरमें दमयन्तीद्वारा नलका वरण, देवताओंका नलको वर देना, देवताओं और राजाओंका प्रस्थान, नल-दमयन्तीका विवाह एवं नलका यज्ञानुष्ठान और संतानोत्पादन
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श्लोक 19
श्लोक
3.57.19
यथा देवै: स मे भर्ता विहितो निषधाधिप:।
तेन सत्येन मे देवास्तमेव प्रदिशन्तु मे॥ १९॥
अनुवाद
यदि देवताओं ने निषादों के राजा नल को मेरा पति चुना है, तो उस सत्य के बल से देवता मुझे उसके विषय में बताएँ।
"If the gods have chosen Nala, the king of Nishadhans, as my husband, then by the power of that truth the gods should tell me about him." 19.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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