Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.57.18: यदि मैं मन, वाणी और कर्म से कभी भी सदाचार से विचलित नहीं हुआ हूँ, तो उस सत्य के प्रभाव से देवता मुझे राजा नलकी का जन्म प्रदान करें ॥18॥ | mahabharat अध्याय 3.57: स्वयंवरमें दमयन्तीद्वारा नलका वरण, देवताओंका नलको वर देना, देवताओं और राजाओंका प्रस्थान, नल-दमयन्तीका विवाह एवं नलका यज्ञानुष्ठान और संतानोत्पादन । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यदि मैं मन, वाणी और कर्म से कभी भी सदाचार से विचलित नहीं हुआ हूँ, तो उस सत्य के प्रभाव से देवता मुझे राजा नलकी का जन्म प्रदान करें ॥18॥
'If I have never deviated from good conduct through my mind, speech and actions, then may the gods grant me the birth of King Nalaki through the influence of that truth. 18॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥