श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 57: स्वयंवरमें दमयन्तीद्वारा नलका वरण, देवताओंका नलको वर देना, देवताओं और राजाओंका प्रस्थान, नल-दमयन्तीका विवाह एवं नलका यज्ञानुष्ठान और संतानोत्पादन  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  3.57.12 
यं यं हि ददृशे तेषां तं तं मेने नलं नृपम्।
सा चिन्तयन्ती बुद्धॺाथ तर्कयामास भाविनी॥ १२॥
 
 
अनुवाद
वह जिस किसी को भी देखती, उसे राजा नल ही समझने लगती। भाविनी राजकुमारी इस बात पर विचार करके मन ही मन विचार करने लगी॥12॥
 
Whichever person she looked at, she began to think of him as King Nala. The Bhavini princess thought over it and began to reason with herself.॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)