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mahabharat 3.57.11: उनके रूप-रंग में कोई अंतर नहीं था। वे पाँचों नल जैसे ही दिखते थे। उन सबको एक साथ बैठे देखकर विदर्भ की राजकुमारी को संदेह हुआ और वह असली राजा नल को पहचान नहीं पाई।   |   mahabharat अध्याय 3.57: स्वयंवरमें दमयन्तीद्वारा नलका वरण, देवताओंका नलको वर देना, देवताओं और राजाओंका प्रस्थान, नल-दमयन्तीका विवाह एवं नलका यज्ञानुष्ठान और संतानोत्पादन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 57: स्वयंवरमें दमयन्तीद्वारा नलका वरण, देवताओंका नलको वर देना, देवताओं और राजाओंका प्रस्थान, नल-दमयन्तीका विवाह एवं नलका यज्ञानुष्ठान और संतानोत्पादन  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  3.57.11 
तान् समीक्ष्य तत: सर्वान्निर्विशेषाकृतीन् स्थितान्।
संदेहादथ वैदर्भी नाभ्यजानान्नलं नृपम्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
उनके रूप-रंग में कोई अंतर नहीं था। वे पाँचों नल जैसे ही दिखते थे। उन सबको एक साथ बैठे देखकर विदर्भ की राजकुमारी को संदेह हुआ और वह असली राजा नल को पहचान नहीं पाई।
 
There was no difference in their appearance or colour. All five of them looked like Nala. Seeing them all sitting in one place, doubt arose and the princess of Vidarbha could not identify the real king Nala.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)