श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 57: स्वयंवरमें दमयन्तीद्वारा नलका वरण, देवताओंका नलको वर देना, देवताओं और राजाओंका प्रस्थान, नल-दमयन्तीका विवाह एवं नलका यज्ञानुष्ठान और संतानोत्पादन  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  3.57.10 
तत: संकीर्त्यमानेषु राज्ञां नामसु भारत।
ददर्श भैमी पुरुषान् पञ्चतुल्याकृतीनिह॥ १०॥
 
 
अनुवाद
भरत! उसके बाद राजाओं के नाम, रूप, यश और पराक्रम का परिचय दिया गया। भीमकुमारी दमयन्ती ने आगे जाकर देखा कि यहाँ पाँच पुरुष एक ही स्थान पर एक ही आकृति वाले बैठे हुए हैं॥10॥
 
Bharat! After that the names, beauty, fame and valour of the kings were introduced. Bhimakumari Damayanti went ahead and saw that here five men were sitting in one place with the same figure.॥ 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)