श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 57: स्वयंवरमें दमयन्तीद्वारा नलका वरण, देवताओंका नलको वर देना, देवताओं और राजाओंका प्रस्थान, नल-दमयन्तीका विवाह एवं नलका यज्ञानुष्ठान और संतानोत्पादन  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  3.57.1 
बृहदश्व उवाच
अथ काले शुभे प्राप्ते तिथौ पुण्ये क्षणे तथा।
आजुहाव महीपालान् भीमो राजा स्वयंवरे॥ १॥
 
 
अनुवाद
बृहदश्व मुनि कहते हैं - राजन ! तत्पश्चात जब शुभ समय, शुभ तिथि और शुभ अवसर आया, तब राजा भीम ने समस्त भूपालों को स्वयंवर के लिए बुलाया ॥1॥
 
Brihadashva Muni says – King! Thereafter, when the auspicious time, auspicious date and an auspicious occasion arrived, Raja Bhima called all the Bhupals for Swayamvara. 1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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