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mahabharat 3.56.8: 'और देवताओं को ही पाकर शुद्ध वस्त्र, दिव्य और विचित्र पुष्प तथा मुख्य-मुख्य आभूषणों का सुख भोगो। 8॥   |   mahabharat अध्याय 3.56: नलका दमयन्तीसे वार्तालाप करना और लौटकर देवताओंको उसका संदेश सुनाना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 56: नलका दमयन्तीसे वार्तालाप करना और लौटकर देवताओंको उसका संदेश सुनाना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  3.56.8 
विरजांसि च वासांसि दिव्याश्चित्रा: स्रजस्तथा।
भूषणानि तु मुख्यानि देवान् प्राप्य तु भुङ्क्ष्व वै॥ ८॥
 
 
अनुवाद
'और देवताओं को ही पाकर शुद्ध वस्त्र, दिव्य और विचित्र पुष्प तथा मुख्य-मुख्य आभूषणों का सुख भोगो। 8॥
 
'And after finding Gods only, enjoy the happiness of pure clothes, divine and strange flowers and main ornaments. 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)